प्रगति सर्व कल्याण समिति द्वारा शौचालय बनाने के लिए ग्रामीणों को किया जागरूक

प्रगति सर्व कल्याण समिति द्वारा शौचालय बनाने के लिए ग्रामीणों को किया जागरूक

ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करना एक पुरानी अस्वस्थ्य आदत है। कई लोगों को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के संबंध के बारे में पूर्ण जानकारी नहीं है परन्तु बहुत सारे अध्ययनों से पता चला है कि 80 प्रतिशत बीमारिया का कारण अस्वच्छता ही है। एक ग्राम मल में एक करोड़ वायरस तथा 10 लाख बैक्टीरिया होते है। ये वायरस एवं बैक्टीरिया मक्खी के साथ भोजन के माध्यम से मनुष्यों में प्रवेश कर बीमारी फैलाते हैं। इसके अलावा शौचालय के अभाव मे महिलाओं को विशेषकर सबसे अधिक कठिनाई होती है, जिन्हें अंधकार होने का इंतजार करना पड़ता है तथा साँर, बिच्छू आदि से काटने का तथा उनके सम्मान का खतरा भी बना रहता हैं ।

बच्चों के शौच के बारे में भी कुछ भ्रान्तियाँ है कि यह हानिकारक नहीं होता है। परन्तु ऐसी बात नहीं है यह भी वयस्क के मल की तरह हानिकारक होता है। बच्चों में पोलियों का वायरस भी खुले में किये गये शौच के माध्यम से फैलता है।

भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए माँग आधारित एवं जन केन्द्रित अभियान है, जिसमें लोगों की स्वच्छता सम्बन्धी आदतों को बेहतर बनाना, स्वसुविधाओं की माँग उत्पन्न करना और स्वच्छता सुविधाओं को उपलब्ध करना, जिससे ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाया जा सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता की प्रगति में तेजी लाने के लिए भारत सरकार ने टीएससी में आमूल-चूल बदलाव किए गए हैं, जिसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में अब निर्मल भारत अभियान (एनबीए) कहा गया है। निर्मल भारत अभियान का उद्देश्‍य चरणबद्ध, सेचूरेशन मोड में समस्‍त समुदायों में स्‍वच्‍छता सुविधाओं की व्‍यवस्‍था करके मनोवृ‍त्ति में स्‍थायी बदलाव लाना है जिसका परिणाम ‘निर्मल ग्राम’ के रूप में सामने आएगा।

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