कुडियाघाट पर सफाई करते प्रगति सर्व कल्याण समिति के लोग

कुडियाघाट पर सफाई करते प्रगति सर्व कल्याण समिति के लोग

इनके प्रयास से कम से कम अपना घर, आसपास और शरीर को साफ रखने की बात लोगों के जेहन में उतर जाए तो डॉक्टरों के पास भीड़ भी घट जाएगी और काफी हद तक बीमारी पर खर्च होने वाले पैसे की बचत हो जाएगी। सरकार को भी इस मायने में राहत मिलेगी कि उसे गंदगी जनित रोगों के उपचार में अधिकांश फंड नहीं देना पड़ेगा और यही रुपया आम आदमी को असाध्य रोगों से लडऩे में मदद देने के काम आ जाएगा। अभी तो गांव और शहर में हालात ये हैं कि डॉक्टर नामी अथवा बिना डिग्री का, सभी के क्लीनिकों पर ऐसे मरीजों की भीड़ रहती है जो संक्रमण से फैलने वाले रोगों वायरल बुखार, खांसी, टीबी, चर्म रोगों आदि से प्रभावित होते हैं। इलाज के चर्चित डॉक्टर पहले इनसे दो-चार सौ रुपये फीस वसूल लेते हैं, उसके बाद एंटीबॉयटिक समेत चार-पांच दवाओं का पर्चा पकड़ा देते हैं, दवाएं कम से कम पांच दिन के लिए लिखी जाती हैं, बाजार से इन्हें खरीदने में तीन-चार सौ का खर्च मामूली बात है। गांव-देहात में फर्जी डॉक्टरों की तो गंदगी जनित बीमारियों में खूब चांदी कटती है, उल्टी-डायरिया की शिकायत में ये तुरंत ग्लूकोज की बोतल चढ़ाने लगते हैं, मरीज एक-दो दिन टिक गया तो हजार-दो हजार की वसूली हो जाती है। इलाज गलत होने पर मरीजों की जान पर आफत आ जाती है। ऐसे में आनन-फानन उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है|इसलिए  कुडियाघाट पर सफाई करते प्रगति सर्व कल्याण समिति के लोग

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